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रणथंभौर बाघ परियोजना की अनूठी पहल: शिक्षा सहयोगियों से संवर रहा ग्रामीण बच्चों का भविष्य

 



सवाई माधोपुर | 11 फरवरी, 2026

रणथंभौर बाघ परियोजना अब केवल बाघों के संरक्षण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह वन्यजीव क्षेत्र से सटे ग्रामीण इलाकों के बच्चों की शिक्षा में भी नई रोशनी बिखेर रहा है। विभाग की इस विशेष पहल के तहत सरकारी स्कूलों में 'शिक्षा सहयोगियों' की नियुक्ति की गई है, जिससे बोर्ड परीक्षाओं सहित अन्य कक्षाओं के परिणामों में अभूतपूर्व सुधार देखने को मिल रहा है।












इन स्कूलों में मिल रहा है विशेष सहयोग

मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) शारदा प्रताप सिंह एवं उप वन संरक्षक मानस सिंह के निर्देशन में वर्तमान सत्र में सात शिक्षा सहयोगी निरंतर सेवाएं दे रहे हैं। इनमें निम्नलिखित विद्यालय शामिल हैं:

 * राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय: डूंगरी, बसों कला, भूरी पहाड़ी, खिदरपुर जादौन

 * राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय: म्हारौ और भावपुर

ये शिक्षा सहयोगी विशेष रूप से गणित, विज्ञान, अंग्रेजी, इतिहास और पर्यावरण जैसे कठिन माने जाने वाले विषयों में विद्यार्थियों की नींव मजबूत कर रहे हैं। इस पूरे कार्यक्रम का समन्वय सोशियोलॉजिस्ट ममता साहू द्वारा किया जा रहा है।

शानदार परिणाम: 95% तक पहुँचा ग्राफ










वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों से इस कार्यक्रम के सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं। अस्थायी शिक्षा सहयोगियों की मदद से ग्रामीण स्कूलों का परीक्षा परिणाम 90 से 95 प्रतिशत के बीच रहा है।

> खास बात: इन शिक्षा सहयोगियों का मानदेय 'रणथंभौर कंजर्वेशन फाउंडेशन' (RTCF) द्वारा वहन किया जाता है, जिससे विभाग और समुदाय के बीच एक मजबूत कड़ी विकसित हो रही है।

सामुदायिक विकास और रोजगार पर जोर

उप क्षेत्र निदेशक मानस सिंह ने बताया कि इस पहल का दोहरा लाभ मिल रहा है। एक तरफ जहाँ ग्रामीण बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय शिक्षित युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हो रहे हैं। इस प्रयास से अभिभावकों और स्थानीय समुदाय का वन विभाग के प्रति विश्वास बढ़ा है और क्षेत्र में एक सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण तैयार हुआ है।

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